समास किसे कहते हैं? (Samas Kise Kahate Hain)
यदि आप “समास किसे कहते हैं (Samas Kise Kahate Hain), समास की परिभाषा (Samas ki paribhasha), समास के भेद (Samas ke bhed), समास-विग्रह तथा समास के महत्वपूर्ण उदाहरण (Samas ke Udaharan) जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इस लेख में समास से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सरल एवं आसान भाषा में दी गई हैं, जो विद्यालयी परीक्षा, बोर्ड परीक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं।
समास का अर्थ क्या होता है? (Samas Ka Arth Kya Hota Hai)
समास शब्द “सम् + आस” से मिलकर बना है।
- सम् का अर्थ — पास
- आस का अर्थ — आना या बैठना
अर्थात समास का अर्थ “पास आना या बैठना” होता है।
समास किसे कहते हैं (Samas kise kahate hain)?
“जब दो या दो से अधिक शब्द या पद अपने बीच के विभक्ति चिन्ह (कारक चिन्ह) या किसी अन्य पद को छोड़कर आपस में मिल जाते हैं, उसी मिलने की क्रिया को समास कहते हैं।”
उदाहरण:-
- कामचोर = काम से चोर
- मनमना = मन के अनुसार
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
- नेत्रहीन = नेत्र से हीन
- नरोत्तम = नर में उत्तम
- महात्मा = महान है जो आत्मा
- कर्मयोगी = कर्म से योगी
चलिए साथियों अब कुछ उपर्युक्त उदाहरण को “विश्लेषण” के द्वारा समझते हैं:-
- कामचोर = काम से चोर ।
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “काम से चोर” में ‘काम और चोर’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “से” को छोड़कर आपस में मिलकर “कामचोर” शब्द का निर्माण किया है।
- मनमना = मन के अनुसार ।
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “मन के अनुसार” में ‘मन और अनुसार’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “के” को छोड़कर आपस में मिलकर “मनमना” शब्द का निर्माण किया है ।
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार ।
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “शक्ति के अनुसार” में ‘शक्ति और अनुसार’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “के” को छोड़कर आपस में मिलकर “यथाशक्ति” शब्द का निर्माण किया है । नेत्रहीन = नेत्र से हीन ।
- नेत्रहीन = नेत्र से हीन
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “नेत्र से हीन ” में ‘नेत्र और हीन’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “से” को छोड़कर आपस में मिलकर “नेत्रहीन” शब्द का निर्माण किया है । नरोत्तम = नर में उत्तम ।
- नरोत्तम = नर में उत्तम ।
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “नर में उत्तम ” में ‘नर और उत्तम’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “में” को छोड़कर आपस में मिलकर “नरोत्तम” शब्द का निर्माण किया है ।
- महात्मा = महान है जो आत्मा ।
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “महान है जो आत्मा ” में ‘महान और आत्मा’ अपने बीच के अन्य पद – “है जो” को छोड़कर आपस में मिलकर “महात्मा” शब्द का निर्माण किया है ।
- कर्मयोगी = कर्म से योगी
- विश्लेषण :- उक्त उदाहरण में “कर्म से योगी ” में ‘कर्म और योगी’ अपने बीच की विभक्ति चिन्ह – “से” को छोड़कर आपस में मिलकर “कर्मयोगी” शब्द का निर्माण किया है। इत्यादि ।
कुछ अन्य, समास के उदाहरण (Kuchh Anya Samas ke Udaharan):-
- रेलगाड़ी = रेल पर चलने वाली गाड़ी ।
- ईश्वरप्रदत्त = ईश्वर द्वारा प्रदत्त
- पददलित = पद से दलित
- आकाशवृति = आकाश से प्राप्त वृत्ति
- रोजगारोन्मुख = रोजगार को उन्मुख ।
- कमरतोड़ = कमर को तोड़ने वाला ।
- माखनचोर = माखन को चुराने वाला ।
- कमलनयन = कमल के समान नयन ।
- दोपहर = दो प्रहर का समाहार
- चंद्रमुखी = चंद्रमा के समान मुख वाली ।
समास का शाब्दिक अर्थ क्या होता है (Samas ka shabdik arth kya hota hain) ?
:- समास का शाब्दिक अर्थ “संक्षेप” होता है ।
समास की विशेषताएं (Samas ki visheshtaen)
(i) समास में दो या दो से अधिक शब्द या पद का मेल होता है ।
(ii) समास में शब्द पास-पास आकर नया शब्द का निर्माण करता है ।
(iii) सामासिक पदों के बीच से विभक्ति चिन्हों का लोप हो जाता है ।
(iv) समास से बने शब्द में कभी-कभी उत्तर पद या अंतिम पद, तो कभी-कभी प्रथम पद या पूर्व पद, तो कभी-कभी दोनों पद, तो कभी-कभी अन्य पद प्रधान होते हैं ।
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समास का महत्व (Samas ka mahattv):-
(i) समास शब्द-रचना की ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अर्थ की दृष्टि से अलग-अलग शब्द मिलकर किसी अन्य शब्द या पद की रचना करते हैं ।
(ii) समास-विग्रह सामाासिक पदों को विभक्ति चिन्ह सहित पृथक (अलग) करके उनके संबंधों को स्पष्ट करने की प्रक्रिया है।
(iii) समास में वर्णों के स्थान पर पदों का महत्व होता है ।
(iv) समास से बने शब्दों के मूल अर्थ को बदला भी जा सकता है और यथावत् भी प्रस्तुत किया जा सकता है ।
(V) समास से बनने वाले शब्द में कभी उत्तर पद तो कभी प्रथम पद और कभी-कभी अन्य पद कभी-कभी दोनों पद प्रधान होते हैं ।
संधि और समास में अंतर क्या होता है? Sandhi Aur Samas Me Antar)
संधि और समास में अंतर निम्नलिखित हैं:-
| संधि | समास |
|---|---|
| (i) संधि में दो या दो से अधिक वर्णो का मेल होता है। जैसे :- अ + अ = आ | (i) समास में दो या दो से अधिक पदों का मेल होता है। जैसे :- काम से चोर = कामचोर देह से चोर = देहचोर। |
| (ii) दो या दो से अधिक वर्णों के मेल से जो विकार (परिवर्तन)होता है, उसे संधि कहते हैं। | (ii) दो या दो से अधिक शब्द या पद अपने बीच के विभक्ति-चिन्ह या अन्य पद को छोड़कर आपस में मिल जाते हैं, उसी मिलने की क्रिया को समास कहते हैं। |
| (iii) संधि को खण्ड करने पर खण्डित भाग को “संधि-विच्छेद” कहा जाता है। | (iii) सामासिक पद को विखण्डित भाग को समास-विग्रह कहा जाता है। |
| (iv) संधि के नियम अधिकांशतः तत्सम शब्दों पर आधारित होते हैं। | (iv) समास में तत्सम् शब्दों के साथ-साथ तद्भव एवं उर्दू के भी शब्द होते हैं। |
| (v) संधि में वर्णों का लोप नहीं होता है, बल्कि दो वर्णों के मेल से केवल विकार उत्पन्न होता है। | (v) समास में पदों के बीच के विभक्ति-चिन्ह या शब्द- का लोप होता है। |
समास-विग्रह किसे कहते हैं? (Samas Vigrah kise kahate hain)?
“समास होने से पूर्व, पहले बिखरे हुए शब्द या पद के रूप को समास-विग्रह कहते हैं ।”
उदाहरण :-
- राजा का कुमार = राजकुमार
- विश्लेषण:- उक्त लिखित उदाहरण में “राजा का कुमार”, समास- विग्रह है तथा “राजकुमार” सामासिक पद या समस्त पद हैं। कीर्ति से बना मंदिर = कीर्तिमंदिर
- कीर्ति से बना मंदिर = कीर्तिमंदिर
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “कीर्ति से बना मंदिर” समास-विग्रह है तथा “कीर्तिमंदिर” सामासिक पद / समस्त पद है ।
- हाथी और घोड़ा = हाथी-घोड़ा
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “हाथी और घोड़ा” समास- विग्रह है तथा “हाथी-घोड़ा सामासिक पद या समस्त पद है।
- आठ कोनो वाला = अठकोना ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “आठ कोनो वाला ” समास- विग्रह है तथा “अठकोना” सामासिक पद या समस्त पद है।
- नरों को भक्षित करने वाला = नरभक्षी ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “नरों को भक्षित करने वाला ” समास- विग्रह है तथा “नरभक्षी” सामासिक पद या समस्त पद है।
- विकास को उन्मुख = विकासोन्मुख ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “विकास को उन्मुख ” समास- विग्रह है तथा “विकासोन्मुख” सामासिक पद या समस्त पद है।
- रोजगार को उन्मुख = रोजगारोन्मुख ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “रोजगार को उन्मुख ” समास- विग्रह है तथा “रोजगारोन्मुख” सामासिक पद या समस्त पद है।
- जी को भरनेवाला = जीभर ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “जी को भरनेवाला ” समास- विग्रह है तथा “जीभर” सामासिक पद या समस्त पद है।
- यश को प्राप्त = यशप्राप्त ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “यश को प्राप्त ” समास- विग्रह है तथा “यशप्राप्त” सामासिक पद या समस्त पद है।
- इंद्रियों को जीतनेवाला = जितेंद्रिय ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “इंद्रियों को जीतनेवाला ” समास- विग्रह है तथा “जितेंद्रिय” सामासिक पद या समस्त पद है । इत्यादि।
- नोट (Note) :- समास-विग्रह में जिस पद पर अर्थ का मुख्य बल पड़ता है, उसे “प्रधान पद” तथा जिस पद पर अर्थ का बल नहीं पड़ता है, उसे गौण पद कहते हैं ।
सामासिक पद या समस्त पद किसे कहते हैं? (Samasik Pad kise kahate hain)?
“समास-विग्रह के मिलने से जो शब्द बनता है, उसे सामासिक पद या समस्त पद या समास युक्त पद कहते हैं।”
उदाहरण:-
- महान है,जो उत्सव = महोत्सव ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “महान है, जो उत्सव” समास-विग्रह है तथा इससे बना पद “महोत्सव” सामासिक पद या समस्त पद हैं ।
- भात और दाल = भात-दाल ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “भात और दाल” समास-विग्रह है तथा इससे बना पद “भात-दाल” सामासिक पद या समस्त पद हैं।
- कमल के समान नयन =कमलनयन ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “कमल के समान नयन” समास-विग्रह है तथा इससे बना पद “कमलनयन” सामासिक पद या समस्त पद हैं ।
- रसोई के लिए घर = रसोईघर ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “रसोई के लिए घर” समास-विग्रह है तथा इससे बना पद “रसोईघर” सामासिक पद या समस्त पद हैं ।
- चंद्र के समान मुख = चंद्रमुख ।
- विश्लेषण :- उक्त लिखित उदाहरण में “चंद्र के समान मुख” समास-विग्रह है तथा इससे बना पद “चंद्रमुख” सामासिक पद या समस्त पद हैं । इत्यादि ।
Samas Kise Kahate Hain में अब समझते हैं samas ke bhed:-
समास के कितने भेद होते हैं (Samas ke kitne bhed hote hain)?
“समास के निम्नांकित छः (06) भेद होते हैं” :-
(क) तत्पुरूष समास
(ख) कर्मधारय समास
(ग) द्वंद्व समास
(घ) द्विगु समास
(ङ) बहुब्रीहि समास
(च) अव्ययीभाव समास ।
- अपवाद :- नेञ् समास ।

(क) तत्पुरूष समास किसे कहते हैं (Tatpurush Samas Kise Kahate hain)?
“जिस समास का उत्तर पद प्रधान तथा पूर्व पद गौण रहता है, उसे तत्पुरूष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- जलधर = जल को धारण करने वाला ।
- विश्लेषण :- जलधर सामासिक पद का समास-विग्रह “जल को धारण करनेवाला” है। जिसमें “जल” पूर्व या प्रथम पद, बल्कि “धर” (धारण करने वाला) उत्तर पद है । अतः प्रथम पद “जल” गौण है तथा उत्तर पद “धर” (धारण करने वाला) प्रधान है ।
- ज्ञानयुक्त = ज्ञान से युक्त ।
- विश्लेषण :- ज्ञानयुक्त सामासिक पद का समास-विग्रह “ज्ञान से युक्त” है। जिसमें “ज्ञान” पूर्व या प्रथम पद, बल्कि “युक्त” उत्तर पद है। अतः प्रथम पद “ज्ञान” गौण है तथा उत्तर पद “युक्त” प्रधान है ।
- मनोहर = मन को हरनेवाला ।
- विश्लेषण :- मनोहर सामासिक पद का समास-विग्रह “मन को हरनेवाला ” है। जिसमें “मन” पूर्व या प्रथम पद, बल्कि “हर” (हरनेवाला) उत्तर पद है । अतः प्रथम पद “मन” गौण है तथा उत्तर पद “हर” (हरनेवाला) प्रधान है ।
- मालगोदाम = माल के लिए गोदाम ।
- विश्लेषण :- मालगोदाम सामासिक पद का समास-विग्रह “माल के लिए गोदाम ” है। जिसमें “माल” पूर्व या प्रथम पद, बल्कि “गोदाम” उत्तर पद है । अतः प्रथम पद “माल” गौण है तथा उत्तर पद “गोदाम” प्रधान है आदि ।
तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं? (Tatpurush Samas Ke Bhed)
“तत्पुरुष समास के निम्नांकित छः (6) भेद होते हैं”:-
(i) कर्म तत्पुरुष (द्वितीया तत्पुरुष)
(ii) करण तत्पुरुष (तृतीया तत्पुरुष)
(iii) सम्प्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी तत्पुरुष)
(iv) आपादान तत्पुरुष (पंचमी तत्पुरुष)
(v) संबंध तत्पुरुष (षष्ठी तत्पुरुष)
(vi) अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी तत्पुरुष) ।
(i) कर्म तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? (Karm Tatpurush Samas kise kahate hain)
” जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से कर्म कारक या विभक्ति चिन्ह (0, को) लोप रहता है, उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं”।
जैसे :-
- माखनचोर = माखन को चुरानेवाला ।
- चित्तचोर = चित्त (मन) को चुरानेवाला ।
- चिड़ीमार = चिड़िया को मारनेवाला ।
- धनुर्धर = धनुः (धनुष) को धारण करने वाला ।
- जीभर = जी को भरनेवाला इत्यादि ।
- नोट(Note) :- कर्म तत्पुरुष समास को “द्वितीय तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है ।
(ii) करण तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? (KaranTatpurush Samas kise kahate hain)
“जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से करण कारक/विभक्ति चिन्ह (से, द्वारा) लोप रहता है, उसे करण तत्पुरुष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- रसभरी = रस से भरी
- धर्मयुक्त = धर्म से युक्त
- ज्ञानयुक्त = ज्ञान से युक्त
- रेलयात्रा = रेल के द्वारा यात्रा इत्यादि ।
- नोट (Note) :- करण तत्पुरुष समास को “तृतीया तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है ।
(iii) संप्रदान तत्पुरुष समास किसे कहते हैं ?(SampradanTatpurush Samas kise kahate hain)
“जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से संप्रदान कारक या विभक्ति चिन्ह (को, के लिए) लोप रहता है, उसे संप्रदान तत्पुरुष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- देशार्पण = देश के लिए अर्पण
- विद्यालय = विद्या के लिए आलय
- मालगोदाम = माल के लिए गोदाम
- फलाकांक्षी = फल के लिए आकांक्षी
- प्रयोगशाला = प्रयोग के लिए शाला इत्यादि ।
- नोट (Note) :- संप्रदान तत्पुरुष समास को “चतुर्थी तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है ।
(iv) अपादान तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? (ApadanTatpurush Samas kise kahate hain)
“जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से अपादान कारक या विभक्ति चिन्ह (से) लोप रहता है, उसे अपादान तत्पुरुष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- देशनिकाला = देश से निकाला ।
- लक्ष्यभ्रष्ट = लक्ष्य से भ्रष्ट ।
- क्रियाहीन = क्रिया से हीन ।
- कामचोर = काम से चोर ।
- जलशून्य = जल से शून्य इत्यादि ।
- नोट (Note) :- अपादान तत्पुरुष समास को “पंचमी तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है ।
(v) संबंध तत्पुरुष समास किसे कहते हैं? (SambandhTatpurush Samas kise kahate hain)
जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से अपादान कारक या विभक्ति चिन्ह (का, के, की) लोप रहता है, उसे संबंध तत्पुरुष समास कहते हैं ।
उदाहरण :-
- राजकुमार = राजा का कुमार ।
- पराधीन = पर के अधीन ।
- रक्तदान = रक्त का दान ।
- नरबलि = नर की बलि ।
- प्राणाहुति = प्राणों की आहुति इत्यादि ।
- नोट (Note) :- संबंध तत्पुरुष समास को “षष्ठी तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है।
(vi) अधिकरण तत्पुरुष समास किसे कहते हैं ?(Adhikaran Tatpurush Samas Kise Kahate Hain)
“जिस तत्पुरुष समास के पद के बीच से अधिकरण कारक या विभक्ति चिन्ह (में, पर) लोप रहता है, उसे अधिकरण तत्पुरुष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- कलाप्रवीण = कला में प्रवीण ।
- आपबीती = आप (स्वयं) पर बीती ।
- कार्यकुशल = कार्य में कुशल ।
- कविश्रेष्ठ = कवियों में श्रेष्ठ ।
- नराधम = नरों में अधम इत्यादि ।
- नोट (Note):- अधिकरण तत्पुरुष समास को “सप्तमी तत्पुरुष समास” भी कहा जाता है।
(vii) नेञ् तत्पुरुष समास किसे कहते हैं ?(Neh Tatpurush Samas Kise Kahate Hain)
“जिस तत्पुरुष समास के पूर्व पद या प्रथम पद में संस्कृत का “अ, अन तथा उर्दू का ना” उपसर्ग लगे होते हैं, जो नकारात्मक अर्थ प्रकट करते हैं, उसे नेञ् तत्पुरुष समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- अशांति = न शांति ।
- अनश्वर = न नश्वर होनेवाला ।
- नागवार = नहीं है गवारा (मंजूर) जो ।
- नालायक = नहीं है लायक जो ।
- अनाशक्त = आसक्ति से रहित ।
- अनसन = असन (भोजन) से रहित ।
- नापाक = नहीं है पाक जो ।
- नापसंद = नहीं है पसंद जो ।
- असभ्य = नहीं है सभ्य जो ।
- अमर = न मरनेवाला ।
- अधीर = न धीर रखनेवाला इत्यादि ।
नेञ् तत्पुरुष समास का पहचान (Neh Tatpurush Samas ko pahchanne ka Niyam) :-
“नेञ् तत्पुरुष समास के प्रथम या पूर्व पद में “अ, अन एवं ना” लगा होता है”।
जैसे:-
- अनाधिकार = अधिकार से रहित ।
- अनमना = मन से रहित ।
- असत्य = न सत्य आदि ।
(ख) कर्मधारय समास (Appositional Compound) किसे कहते हैं (Karmdharay Samas Kise Kahate Hain)?
“जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो तथा प्रथम पद विशेषण एवं उत्तरपद विशेष्य हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं ।
अथवा,
“जिस समास का प्रथम पद/पूर्व पद उपमान तथा उत्तर पद उपमेय हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं”।
उदाहरण :-
- महोत्सव = महान् है,जो उत्सव ।
- विश्लेषण:- उक्त उदाहरण में महोत्सव सामाजिक पद का समास-विग्रह – “महान है, जो उत्सव” में पूर्व या प्रथम पद “महान” विशेषण तथा उत्तर पद “उत्सव” विशेष्य हैं ।
- कमलनयन = कमल के समान नयन ।
- विश्लेषण:- उक्त उदाहरण में कमलनयन सामाजिक पद का समास-विग्रह – “कमल के समान नयन ” में पूर्व या प्रथम पद “कमल” विशेषण तथा उत्तर पद “नयन” विशेष्य हैं ।
- महादेवी = महान् है, जो देवी ।
- विश्लेषण:- उक्त उदाहरण में महादेवी सामाजिक पद का समास-विग्रह – “महान् है, जो देवी ” में पूर्व या प्रथम पद “महान्” विशेषण तथा उत्तर पद “देवी” विशेष्य हैं ।
- चरणकमल = कमल के समान चरण ।
- विश्लेषण:- उक्त उदाहरण में चरणकमल सामाजिक पद का समास-विग्रह – “कमल के समान चरण” में पूर्व या प्रथम पद “कमल” विशेषण तथा उत्तर पद “चरण” विशेष्य हैं ।
- चन्द्रमुख = चंद्रमा के समान मुख ।
- विश्लेषण:- उक्त उदाहरण में चन्द्रमुख सामाजिक पद का समास-विग्रह – “चंद्रमा के समान मुख” में पूर्व या प्रथम पद “चंद्रमा” विशेषण तथा उत्तर पद “मुख” विशेष्य हैं । आदि ।
नोट (Note) :- विशेषण :- जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम का विशेषता बतलाता है उसे विशेषण कहते हैं ।
उदाहरण :-
- सीता सुंदर है । (विशेषण – सुंदर)
- गीता कुरूप है । (विशेषण – कुरूप)
- आम मीठा है । (विशेषण – मीठा)
- नारंगी खट्टा है । (विशेषण – खट्टा) आदि ।
विशेष्य :- जिन संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बतलाई जाती है उसे विशेष्य कहते हैं ।
उदाहरण:-
- कल सुबह मैंने एक “श्वेतमृग” देखा ।
(अतः उक्त वाक्य में श्वेत – विशेषण तथा मृग – “विशेष्य” है, क्योंकि श्वेत (रंग), मृग का विशेषता बता रहा है ।)
- तालाब में नीलकमल खिले हैं ।
(अतः उक्त वाक्य में “नील” – विशेषण तथा कमल – विशेष्य है, क्योंकि नीला (रंग), कमल का विशेषता बतला रहा है ।) आदि।
उपमेय :- जिसकी तुलना की जाती है, वह उपमेय कहलाता है।
उपमान :- जिससे तुलना की जाती है, वह उपमान कहलाता है।
उदाहरण :-
- चरणकमल = कमल के समान चरण ।
(अतः उक्त समास-विग्रह में ‘कमल’- उपमान तथा ‘चरण’ – उपमेय है ।)
- कमलनयन = कमल के समान नयन ।
(अतः उक्त समास-विग्रह में ‘कमल’ – उपमान तथा ‘नयन’ – उपमेय है )
- चंद्रमुखी = चंद्रमा के समान मुख वाली ।
अतः उक्त समास-विग्रह में ‘चंद्रमा’ – उपमान तथा ‘मुख’ – उपमेय है इत्यादि ।
(ग) द्विगु समास किसे कहते हैं (Dwigu Samas Kise Kahate Hain)?
“जिस समास का उत्तर पद प्रधान हो तथा पूर्वपद /प्रथम पद कोई संख्यावाची विशेषण हो, उसे द्विगु समास कहते है“।
उदाहरण :-
- पंचवटी = पाँच वाटों का समाहार।
विशेषण :- उक्त उदाहरण “पंचवटी” का समास-विग्रह “पाँच वाटों का समाहार” है । जिसका प्रथम पद “पाँच” संख्यावाची है तथा दूसरा पद “वाट” प्रधान है ।
- अष्टभूज = आठ भूजा का समुह ।
विशेषण :- उक्त उदाहरण “अष्टभूज” का समास-विग्रह “आठ भूजा का समुह” है । जिसका प्रथम पद “आठ” संख्यावाची है तथा दूसरा पद “भूजा” प्रधान है ।
- त्रिभुज = तीन भूजाओं वाला ।
विशेषण :- उक्त उदाहरण “त्रिभुज” का समास-विग्रह “तीन भूजाओं वाला” है । जिसका प्रथम पद “तीन” संख्यावाची है तथा दूसरा पद “भूजा” प्रधान है ।
- दोपहर = दो प्रहर का समाहार ।
विशेषण :- उक्त उदाहरण “दोपहर” का समास-विग्रह “दो प्रहर का समाहार ” है । जिसका प्रथम पद “दो” संख्यावाची है तथा दूसरा पद “प्रहर” प्रधान है ।
- पंचपात्र = पाँच पात्रों का समुह ।
विशेषण :- उक्त उदाहरण “पंचपात्र” का समास-विग्रह “पाँच पात्रों का समुह ” है । जिसका प्रथम पद “पाँच” संख्यावाची है तथा दूसरा पद “पात्र” प्रधान है । आदि ।
द्विगु समास का महत्वपूर्ण विशेषताएँ (Dwigu samas ka Visheshtaen):-
(i) द्विगु समास का “उत्तर पद” प्रधान होता है ।
(ii) द्विगु समास का पूर्व पद कोई “संख्यावाची” होता है ।
(iii) द्विगु समास का “सामासिक पद” समूह का बोध कराता है ।
(घ) द्वंद समास किसे कहते हैं (Dwandw Samas Kise Kahate Hain)?
“जिस समास का सभी पद प्रधान हो ,उसे द्वंद समास कहते हैं।”
उदाहरण :-
- माता-पिता = माता और पिता ।
- भाई-बहन = भाई और बहन ।
- गौरी-शंकर = गौरी और शंकर ।
- सीताराम = सीता और राम ।
- दाल-भात = भात और दाल ।
- तिरान्वे = नब्बे और तीन रात ।
- दिन-रात = रात और दिन ।
- हरिहर = हरि और हर विष्णु(विष्णुऔर महादेव) ।
- दही-चीनी = दही और चीनी इत्यादि ।
द्वंद समास का प्रमुख विशेषताएं (Dwandw Samas ka Visheshtaen):-
(i) द्वंद समास के सभी पद प्रधान होते हैं ।
(ii) द्वंद समास के पदों के बीच से, और/एवं/अथवा/ या आदि योजक शब्दों का लोप होता है ।
नोट:- समास -विग्रह करने पर पदों के बीच “और, अथवा, या आदि में से जो उचित हो कोई एक लिख देते है ।
(ङ) बहुव्रीहि समास किसे कहते हैं ?(Bahuvrihi Samas Kise Kahate Hain)
:- वह समास जिसका कोई भी पद प्रधान नहीं हो बल्कि अन्य पद प्रधान हो, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं ।
उदाहरण :-
- चक्रपाणि =चक्र है पाणि (हाथ) में जिसके अर्थात् – विष्णु ।
- देवराज = देवों का है जो राजा अर्थात् – इंद्र ।
- मुरारि = मुर् (राक्षस) का है जो अरि (दुश्मन) अर्थात् – कृष्ण ।
- गिरिजा = गिरि से जन्म लिया है जिसने अर्थात् -पार्वती ।
- हंसवाहिनी = हंस है वाहन जिसका अर्थात् – सरस्वती ।
- उदयपुर = राजा उदय सिंह ने बसाया है जिस पूर कोअर्थात् – शहर ।
- वक्षोज = वक्ष (सीने) पर जन्म लेते हैं जो अर्थात् -स्तन इत्यादि ।
बाहुव्रीहि समास के विशेषताएं (Bahuvrihi Samas ki Visheshtaen):-
:-बाहुव्रीहि समास के विशेषताएं निम्न हैं :-
(i) बहुव्रीहि समास का कोई भी पद प्रधान नहीं होता है, बल्कि अन्य पद प्रधान होता है ।
(ii) किसी रूढ़िवादी परंपरा के कारण या किसी विशेष अर्थ धारण करने के करण तथा अन्य लोक प्रचलित अन्य दो प्रचलित शब्द रूढ़ बन जाता है ।
(iii) बहुव्रीहि समास के अधिकांश उदाहरण पौराणिक होते हैं ।
(iv) देवता से संबंधित अधिकांश समास बहुव्रीहि समास होते हैं ।
जैसे :- पीतांबर = पित (पीला) है जिसका अंबर (वस्त्र) अर्थात् – विष्णु ।
अन्नपूर्णा = अन्न से पूर्ण करने वाली है जो अर्थात् -पार्वती ।
कपीश्वर = कपियों का है जो ईश्वर अर्थात् – सुग्रीव ।
चंद्रमौलि = चंद्र है मौलि (मस्तक) पर जिसके अर्थात् -शिवजी आदि ।
(च) अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं (Avyayibhaw Samas Kise Kahate Hain)?
:- जिस समास के पूर्व पद प्रधान हो तथा पूर्वपद में उपसर्ग या कोई अव्यय जुड़ा रहता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं ।
उदाहरण :-
- यथाशीघ्र = जितना शीघ्र हो।
(अतः उक्त उदाहरण “यथाशीघ्र” के पूर्व पद में “यथा” जुड़ा हुआ है, जो एक “उपसर्ग/अव्यय” है।)
- प्रतिहिंसा = हिंसा के बदले हिंसा।
(अतः उक्त उदाहरण “प्रतिहिंसा” के पूर्व पद में “प्रति” जुड़ा हुआ है, जो एक “उपसर्ग/अव्यय” है।)
- आमरण = मरण तक।
(अतः उक्त उदाहरण “आमरण” के पूर्व पद में “आ” जुड़ा हुआ है, जो एक “उपसर्ग/अव्यय” है ।)
- बेहिसाब = बिना हिसाब के।
(अतः उक्त उदाहरण “बेहिसाब” के पूर्व पद में “बे” जुड़ा हुआ है, जो एक “उपसर्ग/अव्यय” है ।)
- यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
(अतः उक्त उदाहरण “यथाशक्ति” के पूर्व पद में “यथा” जुड़ा हुआ है, जो एक “उपसर्ग/अव्यय” है ।) आदि ।
Samas Kise Kahate Hain में अब निम्नलिखित बातों को समझते हैं-
अव्ययीभाव समास के पहचानने का नियम :- अव्ययीभाव समास के पहचानने का नियम निम्नलिखित हैं:-
(i) अव्ययीभाव समास के आरंभ में या पूर्व पद में उपसर्ग – भर, निर्, प्रति, यथा, बे, आ, बा, उप, यावत्, अधि, अनु, आदि लगा रहता है ।
उदाहरण :- भरपेट, निर्विवाद, निर्मक्षिक, निर्विकार, प्रत्यक्ष, प्रतिशत, प्रतिहिंसा, यथायोग्य, यथाशीघ्र, यथोचित, यथासंभव, बेफायदा, बेखटके, बेजान, आजीवन, आमरण, बाअदब, बाइज्जत आदि ।
(ii) यदि समस्त पद वाक्य में क्रिया-विशेषण का काम करें, तो वह अव्ययीभाव समास होते हैं।
उदाहरण :- उसने भरपेट खाना खाया ।
(अतः उक्त वाक्य में “भरपेट” क्रिया-विशेषण है तथा खाया “क्रिया” है।) आदि।
अव्ययीभाव समास के विशेषताएँ क्या हैं (Avyayibhaw samas ki Visheshtaen) :-
“अव्ययीभाव समास के विशेषताएँ निम्नलिखित हैं”:-
(i) अव्ययीभाव समास का पूर्व पद “प्रधान” होता है ।
(ii) इस समास का पूर्व पद कोई “उपसर्ग” होता है ।
(iii) अव्ययीभाव समास के पूर्व पद में कोई “अविकारी” शब्द होता है ।
(iv) अव्ययीभाव समास के पदों की पुनरावृत्ति (दोहराव) होती है, या प्रत्यय के रूप में – अनुस्वार, पूर्वक, उपरांत जुड़े रहते हैं ।
VVi MCQs — Samas Kise Kahate Hain
1. “Samas Kise Kahate Hain” यह समझने के लिए सही विकल्प कौन-सा है?
A. दो या दो से अधिक वर्णों के मेल को
B. दो या दो से अधिक शब्दों या पदों के आपस में मिलने की प्रक्रिया को
C. केवल दो वाक्यों के मेल को
D. किसी शब्द को अलग करने की प्रक्रिया को
उत्तर: B. दो या दो से अधिक शब्दों या पदों के आपस में मिलने की प्रक्रिया को
2. तत्पुरुष समास के कितने भेद हैं?
A. 4
B. 5
C. 6
D. 7
उत्तर: C. 6
3. “विद्यालय” किस Tatpurush Samas Ke Udaharan है?
A. कर्म
B. करण
C. संप्रदान
D. अधिकरण
उत्तर: C. संप्रदान
4. “कामचोर” किस तत्पुरुष समास का उदाहरण है?
A. कर्म
B. अपादान
C. संबंध
D. करण
उत्तर: B. अपादान
5. Samas Kise Kahate Hain की परिभाषा के अनुसार समास में किसका लोप होता है?
A. स्वर का
B. विभक्ति-चिह्न या अन्य पद का
C. संज्ञा का
D. क्रिया का
उत्तर: B. विभक्ति-चिह्न या अन्य पद का
6. “कामचोर” शब्द को देखकर Samas Kise Kahate Hain का कौन-सा उदाहरण समझा जा सकता है?
A. काम का चोर
B. काम में चोर
C. काम से चोर
D. काम के लिए चोर
उत्तर: C. काम से चोर
7. समास की परिभाषा के अनुसार समास में किसका मेल होता है?
A. वर्णों का
B. पदों का
C. वाक्यों का
D. अक्षरों का
उत्तर: B. पदों का
8. समास के भेदों में तत्पुरुष समास की पहचान क्या है?
A. पूर्व पद प्रधान
B. उत्तर पद प्रधान
C. सभी पद प्रधान
D. अन्य पद प्रधान
उत्तर: B. उत्तर पद प्रधान
9. Samas Kise Kahate Hain को समझने के लिए “यथाशक्ति” का सही विग्रह कौन-सा है?
A. शक्ति से युक्त
B. शक्ति के अनुसार
C. शक्ति में स्थित
D. शक्ति का प्रयोग
✅ उत्तर: B. शक्ति के अनुसार
10. “समास” शब्द की रचना किस प्रकार हुई है?
A. सम् + आस
B. सम + स
C. समा + स
D. सा + मास
✅ उत्तर: A. सम् + आस
11. Samas Kise Kahate Hain से जुड़े मुख्य समास के कितने भेद बताए गए हैं?
A. चार
B. पाँच
C. छह
D. सात
✅ उत्तर: C. छह
12. Samas Kise Kahate Hain से संबंधित “राजकुमार” का सही समास-विग्रह क्या है?
A. राजा से कुमार
B. राजा का कुमार
C. राजा के लिए कुमार
D. राजा में कुमार
✅ उत्तर: B. राजा का कुमार
13. “माता-पिता” किस प्रकार के Samas Ke Udaharanहै?
A. तत्पुरुष समास
B. कर्मधारय समास
C. द्वंद्व समास
D. द्विगु समास
✅ उत्तर: C. द्वंद्व समास
14. “यथाशीघ्र” किस Samas Ke Udaharanहै?
A. तत्पुरुष
B. कर्मधारय
C. अव्ययीभाव
D. द्वंद्व
उत्तर: C. अव्ययीभाव
15. “चक्रपाणि” किस समास का उदाहरण है?
A. द्वंद्व
B. बहुव्रीहि
C. द्विगु
D. तत्पुरुष
उत्तर: B. बहुव्रीहि
उम्मीद है कि इस लेख के माध्यम से आपको Samas Kise Kahate Hain (समास किसे कहते हैं), Samas Ke Bhed (समास के भेद), Samas Ki Paribhasha (समास की परिभाषा) और Samas in Hindi से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आसानी से समझ में आई होगी। इस लेख में समास के विभिन्न भेद, जैसे तत्पुरुष समास, कर्मधारय समास, द्विगु समास, द्वंद्व समास, बहुव्रीहि समास और अव्ययीभाव समास के उदाहरण भी दिए गए हैं। उम्मीद है कि यह जानकारी आपकी हिंदी व्याकरण और परीक्षा की तैयारी में उपयोगी साबित होगी।
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